सुबह होने से पहले फांसी क्यों दी जाती है।फांसी सुबह क्यों दी जाती है।subah hone se pahle fansi kyu dete hai

Spread the love

 सुबह होने से पहले फांसी क्यों दी जाती है।subah hone se pahle fansi kyu dete hai


Subah hone se pahle fansi kyu dete hai



कुछ सवाल प्रत्येक इंसान के जहन में होता है उनका जवाब मिलना बहुत मुश्किल होता है ऐसे ही आज हम एक सवाल का जवाब लेकर आए हैं।आज का सवाल है सुबह होने से पहले फांसी क्यों दी जाती है(subah hone se pahle fansi kyu dete hai)।  तो उसका समय 4:00 से 5:00 के बीच रहा है तो क्या खास वजह है आखरी किन कारणों की वजह से फांसी (Capital Punishment) सूर्योदय से पहले दी जाती है आज हम इसी टॉपिक पर लेख लेकर आए हैं 

फांसी का समय सूर्योदय से पहले का समय आज से नहीं है यह प्रक्रिया अंग्रेजों के जमाने से ही चली आ रही है उस समय भी फांसी सुबह के समय में ही दी जाती थी और आज भी वैसा ही हो रहा है। भारत में आखरी फांसी 2020 में निर्भया हत्याकांड के चारों मुलाजिमों को दी गई थी वह आखरी फांसी थी पर यह फांसी भी सूर्योदय से पहले दी गई थी
फांसी सिर्फ भारत में ही नहीं दुनिया में जंहा कहीं भी फांसी दी जाती है उसका समय है सवेरे का ही होता है प्रत्येक राज्य की जेल मैन्युअल होती है उसके अंदर दिए गए नियमों के अनुसार फांसी दी जाती है मुख्य कारणों पर आज हम बात करेंगे कि क्या कारण है सुबह 4:00 से 5:00 के बीच में फांसी देने का

 फांसी देने से पहले क्या क्या करते हैं?


जब फांसी दी जाती है अब केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों से परमिशन लेनी होती है और उसके बाद जेल मैन्युअल के अनुसार यानी हर राज्य की अपनी अलग जेल मैन्युअल होता है। दिल्ली के जेल मैनुअल के मुताबिक़ ब्लैक वॉरंट सीआरपीसी (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) के प्रावधान के तहत जारी किया जाता है.
जेल मैन्युअल एक बहुत बड़ी कानून कि किताब होती है जो जेल में ड्यूटी स्टाफ से लेकर कैदी किस तरह से काम करेंगे उस पर डिटेल से  लिखी होती है । उसकी कुछ बाते आपको भी बताते
हैं।

फांसी देने के नियम

जब किसी कैदी का डेथ वारंट जारी होता है तब जेल सुप्रिडेंट प्रशासन को इसके बारे में जानकारी देता है

डेथ वारंट जारी होने के बाद उस कैदी को फांसी की तारीख बता दी जाती है

अगर कह दे किसी ऐसी जेल में बंद है जहां पर फांसी देने का सिस्टम नहीं है तो डेथ वारंट जारी होने के बाद तुरंत प्रभाव से उसके देखो दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाता है जहां पर फांसी का सिस्टम बना हुआ हो।

डेथ वारंट जारी होने के बाद उस  केदी को बाकी कैदियों से अलग रखा जाता है और उस सेल पर 2 सुरक्षा गार्ड लगाए जाते हैं जो 24 घंटे निगरानी रखते हैं और जब गार्ड की शिफ्ट बदली होती है तब जेल का अधिकारी उस फांसी वाले कैदी कि लताशी लेते हैं। सुप्रीटेंडेंट जेलर या डॉक्टर उस केदी के खानपान की जांच करते हैं और उसके साथ बेहद सावधानी बरती जाती है ताकि  किसी भी तरीके से वाह कैदी अपने आप को चोट या आत्महत्या नहीं कर ले

अमूमन परिस्थिति में कैदी के परिजन को फांसी की सूचना 10 15 दिन पहले ही दी जाती है और उस केदी को आखरी बार अपने परिजनों से मुलाकात करवा दी जाती है।
हंसी फांसी देने के लिए जो रस्सी इस्तेमाल की जाती है उस रस्सी का नाम मनीला रस्सी होता है इस रस्सी की सारी डिटेल जेल मैन्युअल भी लिखी होती है फांसी से कुछ दिन पहले जेल सुपरिटेंडेंट उस रस्सी का निरीक्षण करता है और सुरक्षा लॉकअप में रखवा दिया जाता है अमूमन जेल में  रस्सी एक्स्ट्रा होती है
# फांसी देने के लिए मनीला रस्सी का इस्तेमाल किया जाता है. इस रस्सी की सारी डिटेल्स जेल मैनुअल में लिखी होती हैं. फांसी से एक हफ्ते पहले सुप्रीटेंडेंट की मौजूदगी में इस रस्सी को चेक किया जाता है. चेक करने के बाद रस्सी को सुरक्षित लॉकअप में रख दिया जाता है. जिन जेलों में फांसी दी जाती है वहां कम से कम 2 रस्सियां मेन्टेन करके रखी जाती हैं.



 डेथ वारंट को ब्लेक वारंट क्यों कहा जाता है?

 

 डेथ वारंट जब जारी होता है अब उसमें फांसी की जगह और फांसी की तारीख लिखी जाती है और ब्लैक वारंट इसलिए कहा जाता है क्योंकि उस कागज के चारों तरफ  काले रंग का बॉर्डर बना होता है

अगर फांसी लेने वाला बंदी चाहता है कि उसकी फांसी के समय पंडित पादरि या मौलवी मौजूद हो तो जेल प्रशासन का इंतजाम करते है।

राष्ट्रपति फांसी की सजा कैसे माफ करते हैं जानने के लिए क्लिक करे

सूर्योदय से पहले फांसी क्यों दी जाती है? असली कारण

नैतिक कारण
      नैतिक कारण यह है कि अगर फांसी दिन में दी जाती तो वह कैदी पूरे दिन अपने दिमाग में बुरे ख्याल से झुंझता रहता है जो मानवता के लिहाज से सही नहीं माना गया ।क्यूंकि फांसी के शांत मन होना जरूरी माना गया है। इसके अलावा सुबह जल्दी फांसी देने के बाद उसके परिजन को उस कैदी का अंतिम संस्कार करने के लिए पर्याप्त समय भी मिल जाता है।

प्रशासनिक कारण 
: सूर्योदय से पहले फांसी देने का मुख्य कारण है प्रशासनिक कारण होता है।क्योंकि जेल अधिकारियों की माने तो फांसी देना एक मामूली काम नहीं है एक बहुत बड़ा काम होता है। और इस काम के लिए एक बहुत बड़ी प्रोसेस को फॉलो करना पड़ता है। इसमें समय भी लगता है तो सब प्रक्रिया पहली से त्यार होती है नहीं तो दिन में ज्यादा समस्या होने लगती है।
 और सुबह जल्दी फांसी देने से अन्य कैदियों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ता ताकि जेल में रहने वाले कैदी रोजमर्रा की जिंदगी में चलते रहे और उन पर कोई असर ना पड़े।
    फांसी देने से पहले उस कैदी का मेडिकल परीक्षण होता है और कई प्रकार के रजिस्ट्रेशन तथा हस्ताक्षर भी करने होते हैं।फांसी होने के बाद उसके दी का शरीर उसके परिवार को सौंपा जाता है ।ताकि शाम से पहले उसका अंतिम संस्कार किया जाए।
   
 
यही कारण है बंदी को सुबह जल्दी फांसी देने का क्योंकि जेल अधिकारियों का कहना की  अगर फांसी दिन में होती तो जेल स्टाफ ओर कैदियों का सारा फोकस इसी काम पर होता तो रोजमर्रा के काम में बाधा उत्पन्न होती है इसीलिए इन सारी चीजों से फॉक्स हटाने के लिए और सारी गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए फांसी सुबह के समय दी जाती है

सामाजिक कारण :
        सूर्योदय से पहले फांसी देने का एक कारण सामाजिकरण भी होता है क्योंकि समाज में फांसी देना एक बहुत बड़ा खबर होता है और अगर दिन में फांसी देते तो लोगों की प्रतिक्रिया करने का समय होता और लोग इस पर काफी इंतजार भी करते की कब फांसी होगी। तथा जेल के बाहर जनता इकट्ठे होकर तमाशा करते या हंगमा करते तो इन सब चीजों से बचने के लिए फांसी सूर्योदय से पहले दे दी जाती है ताकि जब लोग उठे तब तक बहुत देर हो जाती है।
आजाद भारत की पहली महिला को फांसी क्यों दी जा रही है जानने के क्लिक करे ओर पढ़े


व्यावहारिक कारण:
               जिस कैदी को फांसी दी जानी है उसका मन सुबह ज्यादा शांत होता है क्योंकि सुबह वह नींद से उठता है तब किसी प्रकार के शारीरिक व मानसिक तनाव नहीं होता। तो उस कैदी को सुबह 3:00 बजे उठाया जाता है और उसके बाद में अपना स्नान पानी फ्रेश होना यह नित्य काम कर लेता है और उसके बाद में अकेले में बैठ कर अपने भगवान से प्रार्थना वगैरा जो भी उसको नित्य काम करना है शांत मन से और अकेले में बैठ कर यह सब कर सकता है अगर यह सब दिन के समय होता तो चारों तरफ से आवाजें आती रहती है तो उसको शांति से यह प्रक्रिया करने में बाधा आती है

तो आप जान चुके होंगे कि सुबह होने से पहले फांसी क्यों दी जाती है

फांसी लगाने में केसा लगता है?

       जिस कैदी को फांसी देनी होती है उसको फांसी घर पर लाया जाता है और उसके मुंह पर काला कपड़ा से ढक दिया जाता है और और फांसी का फंदा उसके गले में लगाकर सेट कर दिया जाता है।
       उसके बाद जल्लाद जैसे ही जल्लाद लीवर खींचता है तो उस शख्स के नीचे का पटरा नीचे चला जाता है ओर वाह शख्स तुंरत झ्टके से लटक जाता है ओर रस्सी का दबाव गर्दन पर जोर पड़ता है।
       ऐसे में उस शख्स की गर्दन लंबी हो जाती है ओर मासपेशियां टूट जाती हैं।ओर बाद में दिमाग का कनेक्शन शरीर से हट जाता है। ओर उसकी चेतना ख़तम हो जाती है। ओर हंसी पाने वाला बंदा बेहोश हो जाता है साथ ही खून का बहाव भी रुक जाता है सांस बंद हो जाता है जिसे घुटन से मर जाता है।

अजमल कसाब को फांसी केसे दी गई जानने के लिए विकिपीडिया पर क्लिक करे

फांसी से कितनी देर में मौत होती है?

अमूमन फांसी लगने के बाद 5 मिनट से लेकर 25 मिनट के भीतर मौत हो जाती है उसके बाद उस फांसी खाने वाले बंदी का मेडिकल बोर्ड बैठता है और मेडिकल परीक्षण होने के बाद डॉक्टर उसे मृत घोषित कर देता है और बाद ने उसकी बॉडी को उसके परिजन को अंतिम संस्कार हेतु सौंप देते हैं

फांसी के वक्त कोन कोन पास रहता है?

फांसी देते समय उस जगह पर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, जेल अधीक्षक और जल्लाद का मौजूद रहना बेहद जरूर है। इनके बिना फांसी देना मुमकिन नहीं है। इन सभी को पहले ही फांसी का दिन ओर समय बता दिया जाता है।

फांसी देने से पहले जल्लाद क्या बोलता है

फांसी के वक्त जल्लाद का रोल बहुत मुख्य होता है । ओर उसके भी कुछ अपने कायदे होते हैं। फांसी देने से पहले जल्लाद बोलता है कि “है मनुष्य मुझे माफ कर दो हिंदू भाइयों को राम राम, मुस्लिम को सलाम, हम क्या कर सकते हैं हम तो हुकुम के गुलाम ह। ऐसा कहते हुए फांसी का लीवर खींच देता है ओर वो फांसी के तख्ते पर खड़ा शख्स नीचे लटक जाता है।

दोस्तो उमीड करता हूं आपको मेरे द्वारा दी गईं जानकारी पसंद आई होगी


Spread the love